अकाल मृत्यु
बात तब की है जब
मैं नवीं कक्षा में पढ़ता था। हमारी कक्षा में अमृतलाल नाम का एक लड़का था। प्यार
से सब उसे 'इम्मी' कहते थे। इम्मी फुटबॉल का बहुत अच्छा खिलाड़ी
था। वह न सिर्फ स्कूल की फुटबॉल टीम में था बल्कि संभाग की टीम में भी खेल चुका
था। उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। कई बार वह समय पर फीस जमा नहीं करवा पाता
था और उसे अक्सर अपनी फीस माफ करवाने के लिए इस-उस के पीछे घूमते देखा जा सकता था।
उससे कहा गया था कि जिस दिन उसका चयन राज्यस्तरीय टीम में हो जाएगा, उसकी फीस माफ कर दी जाएगी। नतीजा यह कि स्कूल
के बाद अँधेरा होने तक वह स्कूल के मैदान पर फुटबॉल खेलता रहता - चाहे अकेला ही,
या दौड़ते हुए मैदान के चक्कर लगाता रहता।


