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Monday, October 10, 2016

प्रायश्चित..भगवतीचरण वर्मा की कहानी



प्रायश्चित

 अगर कबरी बिल्लीत घर-भर में किसी से प्रेम करती थी, तो रामू की बहू से, और अगर रामू की बहू घर-भर में किसी से घृणा करती थी, तो कबरी बिल्ली  से। रामू की बहू, दो महीने हुए मायके से प्रथम बार ससुराल आई थी, पति की प्याकरी और सास की दुलारी, चौदह वर्ष की बालिका। भंडार-घर की चाभी उसकी करधनी में लटकने लगी, नौकरों पर उसका हुक्मक चलने लगा, और रामू की बहू घर में सब कुछ। सासजी ने माला ली और पूजा-पाठ में मन लगाया।