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Sunday, October 23, 2016

चहल्लुम ..शानी की कहानी

चहल्लुम

अचानक फिर मरदाने में इतने जोर का कहकहा उठा कि मरियम चौंककर सीधी बैठ गई। अबकी बार सहना मुश्किल हो गया था। वह चाहती थी कि बस एक बार उन खुदा के बंदों को देख ले जो गमी का खाना खाने आए थे और मौका-महल का जिन्हें बिल्कुल ध्यान नहीं था। पर वह भी संभव नहीं हुआ। आँगन के बीचोंबीच मरदाने और जनाने को अलग-अलग करने के लिए एक बड़ा-सा परदा तना हुआ था, उस पार देखना सचमुच कठिन था।

Friday, October 21, 2016

जली हुई रस्सी ...शानी की कहानी



जली हुई रस्सी

अपने बर्फ जैसे हाथों से वाहिद ने गर्दन से उलझा हुआ मफलर निकाला और साफिया की ओर फेंक दिया। पलक-भर वाहिद की ओर देखकर साफिया ने मफलर उठाया और उसे तह करती हुई धीमे स्वर में बोली, 'क्या मीलाद में गए थे?'

Wednesday, October 19, 2016

एक नाव के यात्री ..शानी की कहानी



एक नाव के यात्री


कीर्ति मारे उत्सुकता के फिर खड़ी हो गई। यह पाँचवी मरतबा था, लेकिन इस बार लगा कि सीटी की आवाज सचमुच दूर से काफी नजदीक होती आ रही है और गाड़ी प्लेटफार्म में प्रवेश करे, इसमें अधिक देर नहीं...
घबराहट से चेहरे का पसीना पोंछने के लिए उसने रूमाल टटोला। नहीं था। बेंच पर छूटने की भी कोई संभावना नहीं थी। जल्दी-जल्दी यही होता है, उसने सोचा। वह साड़ी से ही मुँह पोंछना चाहती थी, लेकिन तभी यक-ब-यक सारे प्लेटफार्म में मुसाफिरों तथा सामान लदे कुलियों की भगदड़ मच गई -