जैसे उनके दिन
फिरे
एक था राजा। राजा
के चार लड़के थे। रानियाँ ? रानियाँ तो अनेक
थीं, महल में एक ‘पिंजरापोल’ ही खुला था। पर बड़ी रानी ने बाकी रानियों के पुत्रों को
जहर देकर मार डाला था। और इस बात से राजा साहब बहुत प्रसन्न हुए थे। क्योंकि वे नीतिवान्
थे और जानते थे कि चाणक्य का आदेश है, राजा अपने पुत्रों को भेड़िया समझे। बड़ी रानी के चारों लड़के जल्दी ही
राजगद्दी पर बैठना चाहते थे, इसलिए राजा साहब
को बूढ़ा होना पड़ा।

