Showing posts with label ममता कालिया. Show all posts
Showing posts with label ममता कालिया. Show all posts

Saturday, October 15, 2016

कामयाब..ममता कालिया की कहानी



कामयाब

हमारा घर उनके घर से सटा हुआ था। दोनों घरों के बीच दीवार थी जिसमें कोई खिड़की नहीं थी। काफी दिन सियासत में पापड़ बेल कर अब वे विधान परिषद के सदस्य बन गए थे। उनका एक पैर लखनऊ और एक इलाहाबाद रहता। दोस्ताना तबीयत पाई थी। अगर एक दिन को भी घर आते, हमसे जरूर मिलते। कई बार ऐसा भी हुआ कि दोपहर में हमारे ही घर पर एक लंबी झपकी मार कर आराम कर लिया।

Wednesday, September 28, 2016

बड़े दिन की पूर्व साँझ..ममता कालिया की कहानी



बड़े दिन की पूर्व साँझ

 मुझे नृत्य नहीं आता था। रुचि भी नहीं थी। मैंने ऐसा ही कहा था।

वह बोला - आता मुझे भी नहीं है।

मैंने सोचा बात खत्म है।

उसने हाथ में पकड़ी मोमबत्ती की तरफ देखा और हकबकाया सा हँस दिया - यह मैंने ले ली थी। मुझे पता नहीं था इसका मतलब यहाँ यह होता है।