Showing posts with label अभिमन्यु अनत. Show all posts
Showing posts with label अभिमन्यु अनत. Show all posts

Thursday, October 20, 2016

अब कल आएगा यमराज..अभिमन्यु अनत की कहानी



अब कल आएगा यमराज 

 
अपने गले में लटके मंगलसूत्र के तमगे को वह अपने अँगूठे और दो अँगुलियों के बीच उलटती-पलटती रही। उसकी सूखी आँखें चारदीवारी की कसमसाती खामोशी को घूरती रहीं। उससे चंद कदमों की दूर पर ही करन अपनी पत्नी के हाथ के तमगे की तरह अपने बदन के पुराने सोफे पर उलटता-पटलता जा रहा था वह पहला अवसर नहीं था कि करन उस तरह की छटपटाहट में था और अपने आपको असहाय पा रही थी। ऐसे अनेक क्षण बीत गए। वह शून्य के दायरे में खामोशी को झेलती रही।

Monday, September 19, 2016

जहर और दवा ... अभिमन्यु अनत की कहानी



 जहर और दवा

जब मैंने पिता को यह कहते सुना कि सोफिया हमारे यहाँ आकर घर के कामों को सँभाल लेगी, उस समय मुझे हैरानी तो तनिक भी नहीं हुई, लेकिन मैं उस बात पर काफी देर तक सोचता ही रह गया था। मेरी माँ को अस्पताल में दाखिल हुए आज तीसरा दिन था। उससे दो दिन पहले से ही मेरी बहन चचेरी बहनों के साथ समुद्र किनारे बँगले पर सर्दी की छुट्टियाँ बिता रही थी। हमारे घर के कामों को सँभालने के लिए किसी व्यक्ति की जरूरत थी, इस बात को मैं पिता से अधिक समझता था। शहर में जहाँ हम रहते हैं, नौकरानियों की कमी नहीं थी, फिर भी सोफिया हमारे घर आ रही थी, इस बात से, जैसे कि मैं ऊपर कह आया हूँ, मुझे आश्चर्य नहीं हुआ। इस प्रश्न को गौर से सोचते हुए मैं यह मान लेने को विवश था कि मेरे पिता को यह गवारा नहीं कि हाथ आया मौका यों ही चला जाए।