महत्तम
समापवर्त्य
उनकी हर चीज में
नफासत थी।
बोल-चाल में संयत
ठहराव। पहनावे में जहीनी चटख और हावभाव में गरिमापूर्ण सादगी। घर की इमारत किसी
कलात्मक वास्तुशिल्पी ने बनाई थी। घुमावदार सीढ़ियाँ, पर्याप्त रोशनी, लुभावना रंग-रोगन, जगह की व्यवस्था में
आमंत्रित-सा करता खुलापन। मुझे तो पुरोहित साहब, यानी मेरे बॉस ने पहले ही बता दिया था कि मिसेज चाँद ने
इंटीरियर डेकोरेशन का कोर्स किया हुआ है। आना पहले उन्हीं को था मगर आखिर वक्त में
उन्हें किसी जरूरी काम से जाना पड़ा तो उन्होंने मुझे ठेल दिया... कि जाओ और फलाँ
बँगले के इंटीरियर में और क्या किया जा सकता है, इसका मुआयना कर आओ। चटख मोटे परदे, विशिष्ट किस्म की मेज-कुर्सियाँ, मेज पर रखे हुए कुछ स्टैच्यूज... हर कमरे की एक अलग ही
सज्जा। घर में घुसने के बाद थोड़ी देर बैठने का मन करे। चीजों को निहारने का मन
करे। रही-सही कसर पूरी कर दी साज-सज्जा के अनुरूप रखी दो-तीन पेंटिंग्स ने जो पूरे
मकान के सौंदर्य पर चार-चाँद लगा रही थीं।




